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Showing posts from September, 2019

पटाखों का इतिहास(History of firecrackers in Hindi )

पटाखो का इतिहास -    दिपावली का पर्व आने के 1 माह पुर्व ही बाजार पटाखों और फुल-जड़ीयों से सज जाते है , दिपावली का त्योहार करोड़ो भारतीयों के आस्था का प्रतीक है , इसी दिन भगवान श्रीराम अयोध्या पधारे थे । दिपावली के दिन पटाखे जलाने की परंपरा है , आपको यह बात जानकर हैरानी होगी की भारत मे पटाखो का व्यापार 10 हजार करोड़ से भी अधिक का है , जाने पटाखों का इतिहास ।
पटाखो का इतिहास(History of firecrackers in Hindi )
पटाखों का अविष्कार -
पटाखो का अविष्कार 9वी से 10वी शताब्दी चीन मे हुआ था , लेकिन इससे जुडी़ 2 कथाये है ।

1.  इस कथा के अनुसार चीन के लोग जंगली जानवरो और बुरी आत्माओ को भगाने के लिए बाज को जलाते थे , बाज खोखला होता है और बीच-बीच मे गाँठे होती है । बाज को आग लगाने से एक धमाकेदार आवाज होती , इस आवाज को सुनकर जानवर भाग जाते थे । उस समय चीन मे त्योहारो व आयोजनो मे बाज का उपयोग पटाखे के रूप मे करते थे ।

इन सब को देखते हुए चीन के रसायन शास्त्रियों ने कुछ रसायनो को मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया । अब इसके साथ बाज को जलाने से और भी तेज आवाज आती ।

13वीं सदी मे इटालियन यात्री मार्को पोलो चीन से इ…

योग क्या है ? What is yoga योग का संक्षिप्त विवरण । Summary of Yoga ।

योग क्या है ? What is yoga योग का संक्षिप्त विवरण । Summary of Yoga । योग का जन्म वेदो से पहले हुआ है और इसके जन्मदात्ता हिरण्यगर्भ जी महाराज है । जिनके बारे रिग्वेद और श्रीमद् भागवद् मे वर्णन मिलता है । वेदो के विकास के पहले ही योग विद्या विकसित हो चुकी थी । योग विद्या के गर्भ से ही वेदो का जन्म हुआ था ।

सृष्टी के आरम्भकाल मे हिरण्यगर्भजी महाराज से अग्नि , वायु , आदित्य और अंगिरा नामक चार महात्माओ ने पढा फिर इनसे महर्षि पतंजलि ने प्राप्त कर " योग दर्शन " नामक योग ग्रंथ लिखा ।


 क्या है ? What is yoga योग का संक्षिप्त विवरण । Summary of Yoga ।
           योग का अर्थ( Means of yoga ) योग शब्द के दो अर्थ है एक जोड़ना और दुसरा है उपाय । महर्षि पतंजलि के अनुसार चित की वृतियो को रोक देना ही योग है । माया के कारण जीवात्मा और परमात्मा  भिन्न - भिन्न मालुम होते है । अद्वैत वेदांत के अनुसार जिस ज्ञान व क्रिया से जीवात्मा को परमात्मा के स्वरूप का ज्ञान होता है उसे ही योग कहते है । माया से बड़ा बंधन संसार मे और कोई नही है । इस माया से छुटकारा पाने का एक मात्र साधन " योग " है …

आदि गुरू शंकराचार्य जी की प्रश्नोत्तरी( Vedant In Hindi )

Vedant Questions and answer


आदि गुरू शंकराचार्य जी की प्रश्नोत्तरी ( Vedants questions and answers ) 
1.प्रश्न - गुलामी की जंजीरो मे कौन जकड़ा है ?   उत्तर - जो इन्द्रियो का दास है ।

2. प्रश्न - मुक्ति किसे कहते है ?    उत्तर - सांसारिक प्रदार्थो के प्रति अनासक्ति ही               मुक्ति है ।

3. प्रश्न - घोर नरक क्या है ?
   उत्तर - मानव शरीर ।

4. प्रश्न - स्वर्ग का मार्ग कौनसा है ?
   उत्तर - वासना का विनाश ही स्वर्ग का पथ है ।

5. प्रश्न - नरक का पथ कौनसा है ?
    उत्तर - नारी शरीर

6. प्रश्न - स्वर्ग कैसे मिलता है ?
    उत्तर - अंहिसा से ।

7. प्रश्न - मनुष्य के शत्रु कौन है ?
    उत्तर - मनुष्य की इन्द्रिया ।

8. प्रश्न - निर्धन कौन है ?
    उत्तर - जिनकी वासनाओ का अंत नही ।

9. प्रश्न - धनी कौन है ?
    उत्तर - सदा संतुष्ट रहने वाला ।

10. प्रश्न - अमृत क्या है ?
       उत्तर - वासना विहीन अवस्था ।

11. प्रश्न - बंधन क्या है ?
      उत्तर - अहम भाव ।

12. प्रश्न - अंधा कौन है ?
       उत्तर - विषय लोलुप व्यक्ति

13. प्रश्न - हलाहल विष क्या है ?
      उत्तर - कामुकता

14. प्रश्न - कौन सदा दुखी रहता है ?

गुरू नानकदेव जी के पुत्र श्रीचंद्र मुनि जी की जीवनी - Biography of Guru nanak's Son srichand muni |

श्रीचंद्र मुनि जी उदासीन संप्रदाय के आचार्य थे । श्रीचंद्र मुनि गुरू नानकदेव के पुत्र थे ।  इन्होने "मात्राशास्त्र" की रचना की जो इनकी प्रसिध्द कृति है , इसके अलावा इन्होने वेद , ब्रह्मसुत्र और भगवद्गीता पर भाष्य लिखा ।


गुरू नानकदेव जी के पुत्र श्रीचंद्र मुनि जी की जीवनी - Biography of Guru nanak's Son srichand muni
परम उदासी , असाधारण वैरागी और भगवान के विलक्षण अनुरागी महात्मा श्रीचंद ने आचार्य शंकर की तरह भारतीय संस्कृति और आध्यातम ज्ञान का संरक्षण किया । उन्होने जीवमात्र को भवसागर से पार उतारने के लिए सुगम और अाचारमुलक़ भक्ति का पथ प्रशस्त किया । श्रीचंद ने धर्म की मर्यादा सुरक्षित की , वे जन्मजात योगी थे । उन्होने ज्ञानयोग की साधना की । महात्मा श्रीचंद ने धर्माचरण का शंखनाद किया । इन्होने भारतीय जीवन को वैदिक मर्योदा से सम्पन्न कर सनातन धर्म को गौरण बढाया ।



जन्म और बचपन -
श्री चंद्र जी का जन्म 8 सितंबर 1494 मे तलवण्डी गाँव मे गुरू नानकदेव जी और माता सुलक्खनी के घर हुआ । इस समय नानकदेवजी बत्तीस वर्ष के थे । महात्मा श्री चंद्र जी के जन्म के समय संत नानक जी घर के बाहर …

बाला साहेब ठाकरे से जुड़े 11 तथ्य (11 Facts About BalaSaheb Thakre )

बाला साहेब ठाकरे से जुड़े 11 तथ्य (11 Facts About BalaSaheb Thakre )


BalaSaheb Thakre ( जन्म1926- मृत्यु2012)

बाला साहेब ठाकरे महाराष्ट्र राजनीति के प्रमुख नेता थे । इन्होने महाराष्ट्र मे मराठी मानुष के हितो की रक्षा के लिए 1966 शिवसेना की स्थापना की । बाला साहेब को कट्टर हिंदुवादी नेता के रूप मे जाना जाता है । बाला साहेब अपने विवादित बयानो के लिए अख्सर सुर्खियो में रहते थे । 2012  में इनके देहांत पर 21 टोपो की सलामी दी गयी थी ।


आज हम जानेगें बाला साहेब ठाकरे से जुड़े 11 किस्से ।

 बाला साहेब ठाकरे से जुड़े 11 तथ्य (11 Facts About BalaSaheb Thakre )
1. Balasaheb's Father And Surname-      
बाला साहेब ठाकरे के पिता केशव सीताराम ठाकरे सयुंक्त महाराष्ट्र आंदोलन मे प्रमुख रूप से सक्रिय रहे । केशव सीताराम ठाकरे ने अपनी बायोग्राफी " माझी जीवनगाथा " मे लिखा की पहले उन्होने पनवेलकर Surname चुनना चाहा लेकिन वे अंग्रेजी साहित्यकार मॉक पिच ठाकरे से इतना प्रभावित थे की इन्होने अपना  Surname  "ठाकरे" रखा ।

2. BalaSaheb Thakre's Family -
बालासाहेब ठाकरे का जन्म पुणे मे 23 …

काशी के संत हरिहर बाबा

काशी के संत हरिहर बाबा -

संत हरिहर बाबा राम के परम रसिक महात्मा था , बाबा भगवान राम के परमभक्त थे । इन्होने अपना पुर्ण जीवन काशी की घाटों पर ही गुजारा । इनकी कृपा से असंख्य लोगों ने आध्यात्मिक शांति प्राप्त की । जीवन के अंतिमकाल तक काशी के भगवती भागीरथी मे नाव पर निवास किया । बाबा भक्तो की कतार हमेशा लगी रहती थी , बाबा के भक्तो मे स्वंय काशी स्म्राट , मदन मोहन मालवीय आदि थे । बाबा सिध्द और दुरदर्शी संत थे ।


बाबा हरिहर का जन्म और प्रारंभिक जीवन --


बाबा हरिहर का जन्म बिहार के छपरा जिले के जाफरपुर ग्राम मे एक प्रतिष्ठीत ब्राह्मण परिवार मे हुआ था । इनके बचपन का नाम सेनापति तिवारी था । इनके माता-पिता बड़े पवित्र विचारो के थे । देवयोग से सेनापति की अल्पावस्था मे ही उनके माता - पिता का देहान्त हो गया था । सेनापति का मन सहसा भगवान की ओर लग गया । कुछ समय तक सोनपुर और भागलपुर मे विद्याध्ययन किया । इसी समय इनके छोटे भाई हरिहर का देहान्त हो गया । इस घटना ने सेनापति के जीवन को पुर्ण रूप से बदल दिया । अब इनके मन मे वैराग्य का उदय हो गया , सेनापति भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या गये ।


हरिहर बाबा का आध्…

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश ( Biography Of Mahavir Swami and Updesh )

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश (Biography Of Mahavir Swami )--

महावीर स्वामी विक्रम संवत के पाँच सौ वर्ष पहले के भारत की बहुत बड़ी ऐतिहासिक आवश्यकता थे । इन्होनें सुख-दुख मे बंधे जीव के लिए शाश्वत दिव्य शान्ति और परम् मोक्ष का विधान किया । महावीर स्वामी जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर थे । जैन धर्म की स्थापना त्रिषभदेव ने की थी । महावीर स्वामी ने इसके विकास मे अहम योगदान दिया था । इन्होने जैन धर्म को पुर्ण तपोमय बना दिया ।



महावीर स्वामी का प्रारंभिक जीवन --

वैशाली राज्य की सीमा पर गण्डकी नदी के तट पर क्षत्रियकुण्डनपुर नगर के राजा सिध्दार्थ और माता त्रिशला के यहा महावीर स्वामी का जन्म हुआ था । संन्यास से पुर्व इनका नाम वर्धमान था । इनके जन्म से पहले इनकी माता को चौदह विचित्र सपने आये थे ।

चैत्र मास की शुक्ला त्रयोदशी को सोमवार के उपाकाल मे महावीर स्वामी ने शिशु वर्धमान के नामरूप जन्म लिया । शिशु का का रंग तपे सोने के समान था । शान्ति और कान्ति से शरीर शोभित और गठीत था ।

माता-पिता ने बड़ी सावधानी से उनका पालन-पोषण किया । रानी त्रिशला अत्यंत गुणवती व सुंदर थी । सिध्दार्थ और त्रिशला दोन…

करमैती बाई का जीवन परिचय ( Karmaiti Bai Biography In Hindi )

करमैती बाई -

आदि गुरु शंकराचार्य और चांडाल ( Aadi Guru Shankracharya And Chandal )

आदि गुरु शंकराचार्य जी का अवतरण 8वी सदी में हुआ था | इन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और हिन्दू धर्म की तरफ लौटने का उपदेश दिया | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार आदि गुरु शंकराचार्य को भगवान शिव का अवतार माना जाता है | आदि गुरु ने Geeta , Brahmasutra , Upnishada पर भाष्य लिखा | हिन्दू धर्म की पुर्नरस्थापना का श्रेय Adi Guru Shankracharya Ji को ही जाता है |



आदि गुरु शंकराचार्य और चांडाल
एक दिन जब वे गंगा तट की ओर जा  रहे  थे , सामने  से  एक चांडाल मद्य  के नशे में झूमता चला आ रहा था |उसके साथ चार कुत्ते भी थे | उनसे स्पर्श हो जाने की शंका से श्री शंकराचार्य ने कहा ,--"  रास्ते के एक और  होकर चलो और मेरे जाने के लिए स्थान छोड़ दो " | चांडाल ने उनकी बात सुनी और कहा , --"  कौन किसको स्पर्श करता है ?  सर्वत्र एक ही वस्तु है , उसके अतिरिक्त और क्या है ? किसके स्पर्श से भयभीत होकर तुम दब-दबकर चल रहे हो ? आत्मा को तो कोई स्पर्श नहीं करता | जो आत्मा तुम्हारे भीतर है , वह मेरे भी है | फिर तुम किससे दूर जाने को कह रहे हो ? मेरी देह को या मेरी आत्मा को ?



इन शब्दों को सुनते ही श्री …

"मेरा शहर बीमार"कविता - Bimar Shahar Poem In Hindi

Hindipoems|


"मेरा शहर बीमार" - Bimar Shahar Poem In Hindi 

वो बुझी बुझी आँखों वाला लड़का ,

जो चौराहे पर मुझे मिला ,

उसी में मुझे बतलाया की ,

मेरा शहर बीमार है  |

शहर की नब्ज तेज़ है  ,

गलिया गर्माहट उछलती है ,

सच ,

मेरा शहर बीमार है  |

याद आता है मुझे

आंगन , गली , चबूतरा

अपना कूदना

चोट , ख़ून , पट्टी और

माँ की डांट

फिर आँखों में उभरते है

भाले , चाकू , फरसे , लाठी ,

बन्दूक , गोली , खून , लाशें और चीखे

सच

मेरा शहर बीमार है |

मुझे उनके नाम की हिचकी आती है

जो शहर के कंधो पर खड़े है ,

उनकी सेहत के लिए जरूरी थे |


कुछ जुलुस / हंगामे

उन्ही की तंदरूस्ती की खातिर

"मेरा शहर आज बीमार है "

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Hindi poem In hindi




हवा महल का इतिहास और रोचक बातें -Hawa Mahal Jaipur History in Hindi

Hawamahal In Hindi | Hawamahal History In Hindi | unknown facts About Hawamahal Jaipur | 

हवामहल राजस्थान के जयपुर में स्थित एक महल/हवेली है | राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से हवामहल भी एक है | हवामहल का निर्माण सन 1798 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था | हवामहल 953 झरोखे है | इन झरोखो से ठंडी ठंडी हवा आने के कारण इनका नाम हवामहल पड़ा | यह  महल ज.डी.ऐ रोड , बड़ी चौपड़ जयपुर में स्थित है 





स्थापना वर्ष - 1798 
स्थापक       -  जयपुर नरेश सवाई प्रताप सिंह 



Hawamahal History In Hindi | हवामहल जयपुर का इतिहास | हवामहल का निर्माण 1798 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह जी द्वारा किया गया था | इस महल का निर्माण राजपूत महिलाओ के लिए करवाया गया था ताकि वे शहर में हो रहे सार्वजानिक उत्स्वों और कार्यकर्मो को देख सके | उस समय राजस्थान में पर्दा - प्रथा  प्रचलन था | जिसमे राजपूत महिलाओ को बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी | ऐसा भी कहा जाता है की इस महल का निर्माण गर्मी से निजात पाने के लिए बनवाया गया था | 


इस महल में 953 खिड़किया है जिसे ठंडी हवा आती हैं | ये पांच मंज़िला ईमारत…

विश्वप्रसिद्ध चारमीनार का इतिहास | Charminar History In Hindi |

Charminar History In Hindi 
चारमीनार भारत में स्थित एक प्रसिद्ध स्मारक और ऐतिहासिक स्थल है | यह प्रसिद्ध स्मारक तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में स्थित है | इस भव्य ईमारत को देखने के लिए लाखो - करोड़ो पर्यटक हर वर्ष आते है | चारमीनार की उचाई 48.7 मीटर है |  इसका निर्माण ईसवी 1591 में क़ुतुब शाही राजवंश के शासक सुल्तान मोहम्मद कुली क़ुतुब शाह द्वारा करवाया गया था | 




चारमीनार का इतिहास 
चारमीनार का निर्माण  ईस्वी सन 1591 में क़ुतुब शाही वंश के पांचवे शासक मोहम्मद कुली क़ुतुब शाह ने करवाया था | मोहम्मद कुली क़ुतुब शाह ने अपने राज्य को कोलकोंडा से हैदराबाद स्थानांतरित किया था , इसके बाद चारमीनार स्मारक और चारमीनार मज़्जिद का निर्माण करवाया गया | 
भारतीय इतिहासकारो का मानना है की  मोहम्मद कुली क़ुतुब शाह ने परवरदिगार से प्रार्थना की थी की मेरे राज्य में पानी और प्लेग की समस्या खत्म हो जाए | | इसके बाद मोहम्मद कुली क़ुतुब शाह ने चारमीनार का निर्माण करवाया |  चारमीनार का निर्माण व्यापार मार्ग पर करवाया गया था | 
चारमीनार की मक्का मज्जिद
चारमीनार के अंदर एक भव्य मज्जिद है जिसे मक्का मज्जिद के नाम से जाना…

मोहम्मद मोमिन खान - Biography of Mohammad Momin Khan Urdu Poet

जन्म - 1800 ( दिल्ली )मृत्यु - 1851 ( दिल्ली ) कार्य - उर्दू कवी 

मोहम्मद मोमिन खान उर्दू कवी - 

मोह्हमद मोमिन खान भारत के प्रसिद्ध उर्दू कविओ में से एक थे | इन्होने अपने जीवन काल में अनेक ग़ज़लें लिखी | यह उर्दू काव्य - जगत के सुप्रसिद्ध कवी थे | 


मोहहमद मोमिन खान का जन्म सन 1800 में दिल्ली के प्रसिद्ध हाकिम परिवार में हुआ | इनके पिता का नाम हाकिम गुलामनबी खान था | इनके दादा हाकिम नामदार खान और इनके भाई हाकिम कामदार खान , मुग़ल साम्राज्य के अंतिम काल में शाही चिकित्स्को के रूप में नियुक्त किये गए थे |

मोह्हमद मोमिन अरबी और फ़ारसी भाषा का पूर्ण अधिकार रखते थे | इन्होने अपने पिता और चाचा से यूनानी  चिकत्सा शास्त्र पढ़ा और काफी समय तक एक योग्य चिकित्स्क के रूप में कार्य किया | नज्म (ज्योतिष ) के क्षेत्र में भी बहुत नाम कमाया | यह शतरंज के प्रसिद्ध खिलाडी थे | यह कला प्रेमी और संगीत प्रेमी भी थे |




उस समय के अंग्रेज पदाधिकारी सर टॉमसन ने इन्हे शिक्षा विभाग में 100 रूपए मासिक वेतन का प्रस्ताव दिया लेकिन इन्होने उसे ठुकरा दिया |

इनका विवाह अन्ज्जुमान उन्नीसा बेगम से हुआ | जिनसे उन्हें अहमद नसीर और …