Skip to main content

Rabindranath Tagore Biography in Hindi - रबीन्द्रनाथ टैगोर जीवन परिचय

रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म बंगाल में हुआ था और वे बंगाली थे , फिर भी वे केवल बंगाल और भारत के नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व की विभूति थे | जिस प्रकार व्यास , वाल्मीकि , कलिदास , तुलसीदास और कबीर किसी देश या प्रान्त के नहीं सम्पूर्ण विश्व के लिए पूजनीय है  , उसी प्रकार रविंद्रनाथ समस्त मानव जगत की सम्पति है |






नाम                     -      रवींद्रनाथ टैगोर 
जन्मदिन             -      7 मई 1861 
उपाधि                 -     लेखक और चित्रकार 
प्रमुख  रचना      -      गीतांजलि 
पुरस्कार           -     नोबेल पुरस्कार 

मृत्यु                 -   7 अगस्त 1947 


प्रारम्भिक जीवन ( Rabindranath Tagore Early Life)


रविंद्रनाथ नाथ का जन्म कोलकाता के जोड़ासांको मुह्हले में हुआ | उनके पिता का नाम महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर था और माता का नाम शारदा देवी | वे अपने पिता के सबसे छोटे पुत्र थे | रविंद्रनाथ बहुत भाग्यशाली थे | उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ जिसमे लक्ष्मी और सरस्वती की बराबर कृपा थी | इनके परिवार में बड़े - बड़े विचारक , तत्वज्ञानी , संगीतज्ञ , कलाकार , विद्वान हो चुके थे | 

रविंद्रनाथ छोटी अवस्था के थे , तभी उनकी माता का देहांत हो गया था | उनका लालन - पालन और देख -भाल घर के दास दसियों द्वारा ही किया गया था | इनकी पढ़ाई के लिए ग्रह शिक्षक नियुक्त किये गए लेकिन इनका मन पढ़ाई में नहीं लगा | स्कूल भी भेजे गए लेकिन वहा से भी भाग निकले | रविंद्रनाथ बचपन से ही स्वतंत्र प्रकृति के थे | रविंद्रनाथ प्रकृति के प्रेमी थे , स्कूल और कॉलेज उनकी अनुकूल नहीं थे | 

बचपन में उन्हें अपने पिता से साथ हिमालय जाने मौका मिला | इस भृमण में इन्होने अपने पिता से कुछ अंग्रेजी , कुछ हिंदी , और कुछ ज्योतिष का ज्ञान मिला | इनके घर में रोजाना सह्त्यिक चर्चा और संगीत चर्चा हुआ करती थी | इसलिए छुटपन से ही इनका मन कला , संगीत , कविताओं के प्रति लगाव हो गया | 

मात्र 11 वर्ष की आयु में इन्होने " सङ्कर शिव संकटहारी " गान गाकर ख्याति अर्जित कर ली थी | निरंतर साहित्यक चर्चा और संगीत चर्चा में प्रतिपालित होने के कारण बचपन से ही कवित्व शक्ति दिखलाई देती थी | 
इन्होने वैष्णव कवियों की कविताए पढ़ कर कितनी ही कविताए रच डाली थी | 

रविंद्रनाथ अपने बड़े भाई के साथ कुछ समय अहमदाबाद रहे थे , वह इन्होने अंग्रेजी साहित्य के बड़े बड़े ग्रंथ पड़े और भाव अवलम्बन कर बांग्ला भाषा में लेख लिखे | 


पहली कविता का प्रकाशन -

मात्र 13 वर्ष की आयु में इनकी प्रथम मुद्रित कविता प्रकाशित हुई थी | "तत्त्व बोधिनी " पत्रिका में " अभिलाषा " नाम की कविता प्रकाशित हुई | 

इसके बाद इनकी कविताए " भारती " नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई | इसके बाद " करुणा " नामक उपन्यास छपता रहा | 

यही से उनके साहित्यिक जीवन की शुरुआत हुई | 

शिक्षा -

17 वर्ष की आयु में विद्याध्ययन के लिए इंग्लैंड गए | वहा जाकर पहले स्कूल और फिर लंदन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया | वह अच्छे अच्छे लोगो के संपर्क में आने का मौका मिला | वही उन्होंने "भरथरी " नामक एक गाथा की रचना की | 

वह उनका मन नहीं लगा और भारत लौट आये | भारत आकर इन्होने " वाल्मीकि प्रतिभा " और " भागना हृदय  " की रचना की | 


शांति निकेतन की स्थापना-

1901 के आस पास इनके मन में अध्यात्म के भाव उमड़ने लगे | इसी को लेकर इन्होने 1901 " नैबेद्य " की रचना की | इसमें प्राचीन भारतीय ऋषि - मुनियो की परम्परा के बारे में बताया हुआ है | इनके मन में एक आश्रम स्थापना का विचार आया |

अतः 1901 में शांति निकेतन की स्थापना की गयी | यह बर्ह्मचर्य आश्रम है जिसमे भारतीय प्राचीन परम्परा की शिक्षा दी जाती है | वर्तमान में यह संस्था " विश्व भारती " के नाम से जानी जाती है |

पत्नी का देहांत(Wife's death)-

रवींद्रनाथ टैगोर जी की पत्नी का देहांत 1902 में हुआ था | इसके 1 के भीतर इनकी मझली पुत्री भी चल बसी | 1903 में अपनी कन्या को वायु परिवर्तन करवाने के लिए अल्मोड़ा गए | 

वही इन्होने " शिशु " नाम का काव्य रचा | 

गीतांजलि की रचना और नोबेल पुरस्कार - 

यह समय इनके अध्यात्म जीवन का मधयपहृ था | इन दिनों आत्मा और ब्रह्म की उपलब्धि की चेष्टा ही इनका प्रधान कार्य था | इनकी कविताए और लेखो का मुख्या लक्षण अध्यात्मिक्तावादी था | 

ऐसी कड़ी में इन्होने 1910 में " गीतांजलि " नामक उपन्यास रचा | इस पुस्तक ने इनकी ख्याति सारे संसार में फैला दी | गीतांजलि प्रकाशित होने के रविंद्रनाथ 3 बार इंग्लैंड गए | 

इसे पढ़कर आयरलैंड के प्रसिद्ध कवी श्री यीट्स इनसे बड़े प्रभावित हुए और बहुत से कवि इनपर मुग्ध हो गए | 

अब रविंद्रनाथ जी की ख्याति यूरोप और अमेरिका में भी फ़ैल गयी | 1913 में इन्हे "नोबेल पुरस्कार " से सम्मानित किया गया | 

नोबेल पुरस्कार पा लेने के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय ने डॉक्टर की उपाधि देकर अपने आप को गौरवान्वित किया | 


देश वापसी पर स्वागत - 

इंग्लैंड से लौटने पर रविंद्र नाथ " शांति निकेतन " पहुंचे | उनको बधाई देने के लिए कलकत्ता से शांति निकेतन से लिए एक स्पेशल ट्रैन से 200 भारतीय और यूरोपियन लोग पहुंचे | 

तब गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने कहा " मेरे साहित्यिक जीवन में देशवासियो द्वारा सदा मेरा विरोध किया गया , आज जब पच्छिम ने मेरी शक्ति स्वीकार कर ली तो देशवासी फुल्ले नहीं समाते , इसलिए आप लोग जो सम्मान का प्याला मेरे लिए लेकर आये है , उसे में केवल छू सकता हु , हृदय से नहीं  पी सकता " 

रविंद्रनाथ टैगोर का स्वर्गवास - 


गुरुदेव रविंद्रनाथ ने जितना लिखा उतना कदाचित किसी दूसरे ने लिखा होगा | परन्तु वे केवल कवी , नाट्यकार या उपन्यास लेखक ही नहीं वरन गायक , अभिनेता , चित्रकार , रचयिता ,दार्श्निक ,पत्रकार और अध्यापक भी थे | 
इन सभी कामो ने उन्हें ख्याति लाभ की थी | अपनी लेखनी से मानव सेवा करने के बाद विश्वकवी ने श्रावणी पूर्णिमा (7 अगस्त 1941 ) को अपनी जीवन लीला समाप्त की | 


भारत के इतिहास में उन्हें वही स्थान प्राप्त है जो प्राचीन महान विचारक और कवियों को प्राप्त है | 







Comments

Popular posts from this blog

Navin Kumar Kabaddi Biography In Hindi -नवीन कुमार का जीवन परिचय

Navin Kumar Kabaddi Biography In Hindi -(Dabbang Delhi ) , ( PKL)




नाम              -         नविन कुमार गोयत 
उपनाम         -          नविन एक्सप्रेस

पेशा            -           कब्बडी (रेडर )
जन्मदिन      -            14  फरवरी 2000

डेब्यू           -         प्रो कब्बडी सीजन 6  (2018 )
ताकत       -          रनिंग हैंड टच

कोच         -           कृष्णा कुमार हूडा 

शारीरिक रूप -

लम्बाई         -  5 फिट 10 इंच 

वजन         -    76 किलोग्राम 

निजी जीवन   - 
जन्म स्थान   - भिवानी हरियाणा ( भारत ) 

  शिक्षा          -   बी,ए

जन्म स्थान   - भिवानी हरियाणा ( भारत )  धर्म             -  हिन्दू 
जाति           -  जाट 

विवाह         - नहीं हुआ

Filmyzilla 2020 : South indian Movie , Bollywood Movie , Hollywood Movie , Tv Show |

Filmyzilla 2020 : भारत के उन पायरेटेड वेबसाइटस् में से एक है जो Movie Release होने के तुरंत बाद अपनी वेबसाइटस् पर Latest Movies , South indian dubbed movie , Bollywood Movies , Hollywood Movies , Tv Shows अपनी वेबसाइटस् पर उपलब्ध करवाती है । जिसे आप आसानी से Movie Download कर सकते है ।

अगर आप Filmyzilla 2020 पर Movies या  Tv Show डाउनलोड करने जा रहे है तो कृप्या आप इस पोस्ट को जरूर पढे , क्योंकि इसमें हम आपको Filmyzilla 2020 के बारे में सब कुछ बताने वाले है ।

हम आपको यह भी बताऐंगे की Filmyzilla 2020  से Movie डाउनलोड करना चाहिए या नही , अगर करना चाहिए तो कैसे ?


Filmyzilla 2020 : South indian Movie , Bollywood Movie , Hollywood Movie , Tv Show |
Filmyzilla क्या है 
 Filmyzilla एक पॉपुलर पाइरेटेड वेबसाइट है जो Movie Release के तुरंत बाद उन Movies  को अपनी साइट पर अपलोड करती है । इस वेबसाइट पर Bollywood movies , South indian Movie , Malalayam Movies , Tamil Movie , Hollywood Movie , Tv Show गैर - कानुनी रूप से अपलोड और डाउनलोड किये जाते है ।

यहा से आप South indian Movie 2020 Download कर सक…

जब महाराणा प्रताप ने अकबर को संधि पत्र भेजा (When Maharana Pratap sent the treaty letter to Akbar)

हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप अपने परिवार सहित जंगलो में चले गए | उस समय परिस्थितियाँ इतनी खराब हो गयी की महाराणा और उनका परिवार घास की रोटी खाने लगे |


एक दिन महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह रोटी खा रहे थे लेकिन तभी एक जंगली ब्याव (जंगली बिल्ली ) उनकी रोटी छिनकर भाग जाती है | भूख के मारे  बालक अमरसिंह रोने लगे यह देखकर राणा प्रताप का ह्रदय करुणा से भर गया | उन्होंने सोचा मैंने अपने पुरे जीवन को इस मातृभूमि के लिए न्योछावर कर दिया लेकिन बदले में मुझे क्या मिला | ये पुत्र -पुत्रिया  दो वक्त की रोटी के लिए तरसते है |

जब महाराणा प्रताप ने अकबर को संधि पत्र भेजा -

 महाराणा प्रताप अकबर को संधि पत्र भेजते है | वो पत्र जब अकबर ने पढ़ा तो उसे भरोसा ही नहीं हुआ | अकबर बड़ा धूर्त था | उसने एक चाल की इस पत्र को वह महाराणा के सबसे बड़े भक्त  पृथ्वीराज सिंह राठौर को दिल्ली  बुलाया | जो हमेशा महाराणा की वीरता का गुणगान करते थे | पृथ्वीराज राठौर बिकारनेर नरेश के छोटे भाई थे |


जब अकबर ने वो पत्र पृथ्वीराज सिंह को दिखाया को उन्हें भरोसा नहीं हुआ और उन्होंने इस पत्र की सच्चाई जानने के लिए महारा…