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नाथ संप्रदाय और सिद्ध योगी गुरु गोरखनाथ (Guru Gorkhnath And Nath Sampraday)

गुरु गोरखनाथ भारत के सिद्ध महात्माओ में से एक है | भारत में नाथ संप्रदाय अपनी एक अलग पहचान रखता है | इस संप्रदाय में बड़े बड़े सिद्ध महात्मा हुए जैसे -गोरखनाथ , मत्स्येन्द्र नाथ   गोगाजी , रामदेवजी , राजा भर्तहरि , राजा गोपीचंद,कनीफनाथ,जालंधर , रेवणनाथ , जैसे अनेको सिद्ध हुए | नाथ संप्रदाय में कुल 12 पंथ होते है | इस पंथ में दीक्षा लेने वाले साधक को कठिन तपस्या व गुरु सेवा के बाद गुरु अपनी स्वैच्छा से साधक को दीक्षा देता है | गुरु गोरख नाथ के गुरु मत्स्येन्द्र नाथ को मन जाता है |

नाथ संप्रदाय भेदभाव का विरोधी है | नाथ संप्रदाय में कोई भी साधक सन्यास ले सकता है चाहे वो किसी भी वर्ण का हो | नाथ संप्रदाय में कुल १२ पंथ है | इन पंथो की जानकारी में नीचे दे रहा हूँ |


  1. सत्यनाथ पंथ  
  2. धर्मनाथ पंथ 
  3. रामनाथ पंथ 
  4. लक्ष्मणनाथ पंथ 
  5. कंथड़ पंथ 
  6. कपिलानी पंथ 
  7. वैराग्य पंथ 
  8. मन्नाथ पंथ 
  9. आई पंथ 
  10. पागल पंथ 
  11. ध्वजनाथ पंथ 
  12. गंगा नाथ 



 ऐसा माना जाता है की नाथ संप्रदाय के प्रथम प्रवर्तक स्वयं आदिनाथ ( शिव ) थे | गुरु गोरखनाथ हठयोगी थे , हठयोग से उन्होंने मृत्यु को जीत लिया था | ऐसा माना जाता है की भी गुरुगोरखनाथ जीवित है | बाबा गोरखनाथ को भगवान शिव का अवतार बताया गया है | गुरु गोरखनाथ ने अपनी उपस्तिथि 4 युगो में दर्ज करवाई है | महाभारत में गुरु गोरखनाथ से जुड़ा वृतांत आता है |

गुरु गोरखनाथ प्रथम शताब्दी के सिद्ध योगी थे | इन्होने उज्जयनी नरेश राजा भर्तहरि ( राजा विक्रमादित्य के बड़े भाई )  को सन्यास की दीक्षा दी थी | बाबा गोरखनाथ को भारत और नेपाल दोनों क्षेत्रो में पूजा जाता है | नेपाल में गोरखा जिला इनके नाम पर ही है | नेपाल के लोग अपने को गोरखा कहलवाना पसंद करते है |

गुरु गोरखनाथ ने सम्पूर्ण भारत की पदयात्रा की थी | उन्होंने भारत , नेपाल , तिब्बत , अफगानिस्तान ,म्यांमार , भूटान आदि देशो की पदयात्रा की थी | उन्होंने नाथ संप्रदाय के विकास में अहम् योगदान दिया | उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले का नाम इनके नाम पर ही है | गोरखपुर में बाबा का भव्य मंदिर है जहा बाबा गोरखनाथ ने कई वर्षो तक तपस्या की | आज उस पवित्र स्थान पर पुरे देश से लाखो श्रद्वालु आते है | भक्तगण बाबा को खिचड़ी चढ़ाते है |

बाबा गोरख नाथ के मंदिर संपूर्ण भारत में है | बहुत गांव व शहरो के नाम बाबा के नाम से है | आदि गुरु शंकराचार्य के बाद भारत के प्रमुख संत , योगी  और महात्मा थे |

गुरु गोरखनाथ का जन्म कथा  (GURU GORKHNATH )

गुरु गोरखनाथ से जन्म को लेकर बहुत सारे मतभेद है लेकिन में भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित किवदन्ति बता रहा हु | गुरु गोखनाथ को लेकर भारत में बहुत सारी  किंवदन्तिया है |


एक बार योगी मत्स्येन्द्रनाथ जी किसी गाओं में भिक्षा मांगने गए | एक स्त्री बाबा के पैरों को स्पर्श कर बोली " बाबा मेरे कोई संतान नहीं है कृपया आप अपनी कृपा दृस्टि मुझ पर कीजिये " यह बात सुनकर बाबा मत्स्येन्द्रनाथ ने अपनी झोली से राख निकली और बोले  इससे तुम्हे पुत्र प्राप्ति हो जाएगी | लेकिन उस महिला ने किसी की बातो में आकर वो भस्म घर के पीछे गोबर के ढेरी में डाल दी | 

लेकिन जब 12 वर्षो बाद गुरु मत्स्येंद्रनाथ उसी गांव में वापस आये को उस महिला से पूछा की बालक कहा है तो महिला ने वो सारी बात बता दी और रोने लगी , तब बाबा ने कहा रोओ मत तुम मुझे उस स्थान पर ले चलो जहा वो भस्म डाली है | मत्स्येंद्रनाथ जी और महिला दोनों उस ढेरी के पास गए ,बाबा ने कहा " गोरख मेरे पास आओ " तभी उस धेरी से एक बालक निकला |   वो ही बालक आगे चलकर गुरु गोरखनाथ से नाम से प्रसिद्ध हुए | 

गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से लोकदेवता गोगाजी का जन्म हुआ था - 

प्रसिद्ध गोगाजी महाराज का जन्म भी गुरु गोरखनाथ के आर्शीवाद से ही हुआ था | इनकी माता को गुगल नाम का फल दिया था और इस फल के खाने से ही वे गर्भवती हुए थी | इस फल से नाम से ही इनका नाम गोगाजी जी रखा गया था | गोगाजी ने अपने अंतिम समय में नाथ संप्रदाय से दीक्षा ली थी | गोगाजी को जाहरपीर के नाम से भी जाना जाता है | राजस्थान , हरियाणा , गुजरात में लोकदेवता से रूप में पूजा जाता है | राजस्थान से चूरू जिले में इनका बहुत बड़ा मंदिर है जहा लाखो भक्त आते है | 

बाप्पा रावल को चमत्कारी तलवार देना -

मेवाड़ की स्थापना गुरु गोरखनाथ से आर्शीवाद के फलस्वरूप ही हुए थी | राजकुमार बाप्पा रावल किशोरावस्था में जंगल में शिकार खेलने गए वह उन्होंने तपस्या  में लींन बाबा गोरखनाथ को देखा | बाप्पा ने उनके बहुत सेवा की जब गुरु गोरखनाथ तपस्या से जागे तो वे बाप्पा रावल पर बहुत प्रसन्ना हुए और उन्होंने बाप्पा को एक चमत्कारी तलवार दी | जिसके बल पर मेवाड़ की स्थापना की |

नाथ संप्रदाय के नवनाथ -


गुरु गोरखनाथ की रचनाऐ - 

  • सबदी                                                           
  • नवग्रह
  • नवरात्र
  • अष्टपारछ्या
  • रह रास
  • ग्यान -माला
  • आत्मबोध (2)
  • व्रत
  • निरंजन पुराण
  • गोरख वचन
  • इंद्री देवता
  • मूलगर्भावली
  • खाणीवाणी
  • गोरखसत
  • अष्टमुद्रा
  • चौबीस सिद्ध
  • षडक्षरी
  • पंच अग्नि
  • अष्ट चक्र
  • अवलि सिलूक
  • काफिर बोध
  • पद
  • शिष्यादर्शन
  • प्राण -सांकली
  • नरवै बोध
  • आत्मबोध
  • अभय मात्रा जोग
  • पंद्रह तिथि
  • सप्तवार
  • मंछिद्र गोरख बोध
  • रोमावली
  • ग्यान तिलक
  • ग्यान चौंतीसा
  • पंचमात्रा
  • गोरखगणेश गोष्ठी
  • गोरखदत्त गोष्ठी (ग्यान दीपबोध)
  • महादेव गोरखगुष्टि
  • शिष्ट पुराण
  • दया बोध
  • जाति भौंरावली (छंद गोरख)










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नाम              -         नविन कुमार गोयत 
उपनाम         -          नविन एक्सप्रेस

पेशा            -           कब्बडी (रेडर )
जन्मदिन      -            14  फरवरी 2000

डेब्यू           -         प्रो कब्बडी सीजन 6  (2018 )
ताकत       -          रनिंग हैंड टच

कोच         -           कृष्णा कुमार हूडा 

शारीरिक रूप -

लम्बाई         -  5 फिट 10 इंच 

वजन         -    76 किलोग्राम 

निजी जीवन   - 
जन्म स्थान   - भिवानी हरियाणा ( भारत ) 

  शिक्षा          -   बी,ए

जन्म स्थान   - भिवानी हरियाणा ( भारत )  धर्म             -  हिन्दू 
जाति           -  जाट 

विवाह         - नहीं हुआ

अरुण जेटली का जीवन परिचय | Arun Jaitley Biography In Hindi

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अरुण जेटली भारतीय राजनीती के प्रसिद्ध राजनेता थे | 2014 को सत्ता में आयी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में वित्त मंत्री रहे थे तथा अपने जीवनकाल में केंद्रीय मंत्री,रक्षा मंत्री  के साथ-साथ अनेक पदों पर आसीन रहे |
एक वकील के राजनेता तक का सफर बहुत ही उतार - चढ़ाव  वाला रहा |



नाम        (Name)   -  अरुण जेटली
जन्मदिन               - 28 दिसम्बर 1952
पिता का नाम       - महाराज किशन जेटली
माता का नाम     -   रतनप्रभा जेटली
पत्नी का नाम      -   संगीता जेटली
संतान                -   रोहन जेटली और सोनाली जेटली
मृत्यु                   -  25 अगस्त 2019



व्यक्तिगत जीवन -

अरुण जेटली जी का जन्म दिल्ली में महाराज किशन व माता रतनप्रभा के घर हुआ | इनके पिता पेशे से वकील थे | इनकी स्कूली शिक्षा दिल्ली के सेंट ज़ेवियर्स स्कूल से की जो उस समय की सबसे प्रसिद्ध स्कूलों में से एक थी | यह बचपन से ही एक होनहार विद्यार्थी के रूप अपनी पहचान बना चुके थे | पढ़ाई के साथ -साथ  खेल में भी इनकी रूचि थी |


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बाल्यकाल में उनका संपर्क हिमालय के सिद्ध 108 जगन्नाथ जी से हुआ | जगन्नाथ ने इनको अध्यात्म पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया | इन्होने अवधूत जी को कई ध्यान और योग विधिया सिखाई | इसके बाद इन्होने अपने शिष्य को इस ज्ञान का प्रसार - प्रचार करने का आदेश दिया |


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महारानी लक्ष्मी बाई झांसी राज्य की महारानी थी | भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख योगदान दिया था | मात्र 23 वर्ष की अल्प आयु में अंग्रेजो से युद्ध के समय वीरगति को प्राप्त हो गयी थी |





नाम                        - लक्ष्मी बाई 
पिता का नाम         - मोरोपंत 

माता का नाम        - भागीरथी बाई

जन्म                     - 19 नवम्बर 1828 

मृत्यु                     - 18 जून       1858 

पुत्र                      - दामोदर राव , आनंद राव 

पति                      - महाराज गंगाधर राव 🔂

प्रारंभिक जीवन (early life) -  रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 में वाराणसी के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था | इनके पिता का नाम मोरोपंत एवम माता भागीरथी बाई था | इनके पिता मोरोपंत मराठा बाजीराव के सेवा में थे |  इनके बचपन का नाम " मनु " था | 4 वर्ष की आयु में इनकी माता का देहांत हो गया था | माता के देहांत के बाद इनके पिता मोरोपंत ने इनको अपने पास बुला लिया | मनु बाई अपने पिता के साथ दरबार जाती थी | वहा पर उन्होंने शास्त्र और शस्त्र दोनों की शिक्षा प्राप्त  की | पेशवा इनको प्यार से " छबीली…